कौन हैं सोनम वांगचुक और उनका मिशन?

Sonam Wangchuk School: लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट , इंजीनियर 3 इडियट्स के हीरो को तो आप जानते ही होंगे Sonam Wangchuk आजकल खूबसूरतियां बटोर रहे हैं।
लद्दाख की जो पारिस्थितिक सोमेर्विन चलता स्थानीय संस्कृति और स्वसन के समर्थ में सोनम वंश भूख हड़ताल पर बैठकर भारत सरकार से मांग कर रहे थे लेकिन इसी बीच प्रदर्शन हिंसक हो जाने के कारण उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया है । सोनम वांगचुक ने लद्दाख के डेवलपमेंट के लिए अनेकों कार्य किए हैं उनमें से उन्होंने एक ऐसा स्कूल बनाया है जिसमें दसवीं फेल बच्चों को एडमिशन दिया जाता है ।
SECMOL स्कूल की विशेषताएँ

स्थान और उद्देश्य
Sonam Wangchuk School सोनम वांगचुक का स्कूल लेह के Phey गांव में है. सोनम वांगचुक लद्दाख में दो संस्थाएं चलाते हैं – एक का नाम है ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL)’ और दूसरी है हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL)। इन संस्थाओं का मकसद शिक्षा, पर्यावरण और समाज की भलाई के लिए काम करना है। लेह के Phey गाँव में सोनम वांगचुक का जो SECMOL स्कूल है, वो कई वजहों से बहुत खास है। चलिए, इसके बारे में थोड़ा और जानते हैं।
SECMOL में 10वीं फेल को एडमिशन

इनीशिएटिव SECMOL की शुरुआत सोनम वांगचुक ने लद्दाख के कुछ युवा छात्रों के साथ मिलकर 1988 में किया था इनका मकसद बहुत सिंपल था उन बच्चों को अवसर देना जो थोड़ा पढ़ाई में कमजोर है जो दसवीं फेल हो जाते हैं जो 10वीं ड्रॉप आउट होते हैं ताकि वह अपने आप असफलताओं से निराश ना हो और जीवन में आगे बढ़ सके ।
योर स्कूल उन बच्चों के लिए है जो सोचते हैं कि वह दसवीं फेल होने के बाद अपनी पढ़ाई आगे कंटिन्यू नहीं कर सकते उन्होंने उन बच्चों को एक मौका देने के लिए यह स्कूल खुला है जो आर्थिक रूप से भी कमजोर हैं विकलांग अनाथ या जो बिना माता-पिता के बच्चे हैं । साथ में लद्दाखी भाषा भी आनी जरूरी है।
SECMOL फ्री है पढ़ाई

सोनम वांगचुक के SECMOL में पढ़ने लिखने खाने-पीने और रहने की उच्चतम व्यवस्था है और साथ ही ट्यूशन फीस भी नहीं ले जाती यह स्कूल बहुत ही आधुनिक है । SECMOL परंपरागत बोर्ड परीक्षा आधारित पाठ्यक्रम को पूरी तरह नहीं अपनाता , वह वह अधिक व्यवहारिक, अनुभव-आधारित, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण प्रेरित शिक्षा पर जोर देता है बच्चों को अपने जैसा बनना चाहते हैं ताकि बच्चे भी एक अच्छा इंजीनियर एक अच्छा इंसान बने और अपने राज्य और अपने देश का नाम रोशन करें ।
यहाँ दिए जाने वाले प्रमुख प्रशिक्षणों में शात शामिल हैं:
स्थानीय ज्ञान और संस्कृति: छात्रों को स्थानीय पर्यावरण, भाषा और संस्कृति की गहरी समझ दी जाती है ताकि वे क्षेत्र से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।
पारंपरिक भवन निर्माण (रैम्ड अर्थ टेक्नोलॉजी): यह एक विशेष तकनीक है जिसमें मिट्टी को दबाकर मजबूत और टिकाऊ दीवारें बनाना सिखाया जाता है।
सोलर पैसिव आर्किटेक्चर: ऐसी इमारतों को डिजाइन करना सिखाया जाता है जो बिना किसी अतिरिक्त ऊर्जा की खपत के प्राकृतिक रूप से ठंडी और गर्म रह सकें।
आधुनिक हरित तकनीक: सोलर उपकरणों का इंस्टालेशन और रखरखाव सिखाया जाता है, जिससे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग किया जा सके।
सस्टेनेबल कृषि: ग्रीन हाउस बनाना और टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) के लिए ज़रूरी ढाँचों का निर्माण करना भी इस पाठ्यक्रम का हिस्सा है। हरित तकनीक: सोलर उपकरणों का इंस्टालेशन और रखरखाव सिखाया जाता है, जिससे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग किया जा सके।
सस्टेनेबल कृषि: ग्रीन हाउस बनाना और टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) के लिए ज़रूरी ढाँचों का निर्माण करना भी इस पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
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लद्दाख की बर्फीली वादियों में एक ऐसी आवाज गूंज रही है ,जिसने दिल्ली की सत्ता की गलियारों में हलचल पैदा कर दी है । यह आवाज है प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक , साइंटिस्ट और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जिन पर एक फेमस फिल्म 3 ईडियट्स बनाई गई थी जिन्हें हम ‘फुंसुक वांगड़ू’ के रूप में भी जानते हैं। लेकिन इस बार उनका अंदाज़ मजाकिया नहीं, बल्कि बेहद गंभीर और चेतावनी भरा है।














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